काश कि जैसा सोचा मैंने …

काश कि जैसा सोचा मैंने,

वैसा ही सब कुछ होता।

आँखें ना नम होती मेरी,

और ना मेरा दिल रोता।

काश कि जैसा सोचा मैंने, 

वैसा ही सब कुछ होता।

काश कि जैसा सोचा मैंने, 

वैसा ही सब कुछ होता।

सोचा था कि सुमन खिलेंगे,

चमन मेरा भी महकेगा।

झाँक हृदय में देखे कोई,

भावुकता को समझेगा।

किंतु वही तो हुआ नहीं,

जिसकी जीवन भर चाह रही।

कानों के लिए जो अमृत हो,

किसी ने ना ऐसी बात कही।

मत सोच चकोर ये बात कभी, 

कि तड़पा तू ही इकलौता।

काश कि जैसा सोचा मैंने, 

वैसा ही सब कुछ होता।

ये दिखी रोशनी, हुआ सवेरा,

किंतु ये तो था बस भ्रम मेरा।

जीत लेता मैं ये जग सारा,

संग जो मिल जाता दम तेरा।

अभी यद्यपि देर ना हुई,

इंतजार अभी शेष रहा।

मिला नहीं, पहले बिछड़ा वो,

जीवन भर ये क्लेश रहा।

ओ हृदय मेरे अब मान भी जा, 

जो कुछ पाता है, वो खोता।

काश कि जैसा सोचा मैंने, 

वैसा ही सब कुछ होता।

काश कि जैसा सोचा मैंने, 

वैसा ही सब कुछ होता।

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