मैं हार नहीं मानूँगा

हाँ, मैं हार नहीं मानूँगा।


हाँ, मैं हार नहीं मानूँगा।
हाँ, मैं हार नहीं मानूँगा।

बाधाएं सुरसा बन जाएं,
चाहे आंधी-तूफां आएं,
दिनकर धरती-आग लगाए,

पर मैं हार नहीं मानूँगा।
हाँ, मैं हार नहीं मानूँगा।

स्वेद की तुलना हो झरने से,
नेत्र मेरा दिन-रैना बरसे,
खून बहे फिर भी ना तरसे,

पर मैं हार नहीं मानूँगा।
हाँ, मैं हार नहीं मानूँगा।

सांस की डोरी टूट रही हो,
धड़कन दिल की रूठ रही हो,
दर्द की गांठें फूट रही हों,

पर मैं हार नहीं मानूँगा।
हाँ मैं हार नहीं मानूँगा।

दुनिया फिर दुत्कार लगाए,
मित्र मेरे मुझे दूर भगाएं,
अपने भी जब ना अपनाएं,

तब मैं हार नहीं मानूँगा।
हाँ, मैं हार नहीं मानूँगा।

जब सोचा तो जीत है पक्की,
निर्णय मुझको करना नक्की,
कर्म में डूबा, बना मैं लक्की,

बिना जीत अब ना मानूँगा।
हाँ, मैं हार नहीं मानूँगा।

हाँ, मैं हार नहीं मानूँगा।
बिल्कुल हार नहीं मानूँगा।।

— घनश्याम शर्मा

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