हंसी बांटता हूँ

हंसी बांटता हूँ,

खुशी बांटता हूँ।

ये दौलत तो मैं

हर घड़ी बांटता हूँ।

मिले गम मुझे तो

लगे वो भी हंसने,

खुशी की नयी

फुलझड़ी बांटता हूँ।।


जब आपको लगता है कि आप हार रहे हैं या हार चुके हैं, दरअसल वो आपकी जीत की पूर्व सूचना होती है। और जब आपको लगता है कि आप जीत चुके हैं या जीत रहे हैं, दरअसल ये भ्रम है, वास्तव में ऐसा कुछ नहीं होता। भगवान राम अयोध्या से सबकुछ हारकर वनवास गये; ये जीत थी उनकी। रावण पर विजय पायी, माता सीता को घर लाये, अग्नि परीक्षा ली; हार थी उनकी। क्या मिला उन्हें?? भगवान श्रीकृष्ण जेल में पैदा हुए, जन्म देने वाली माँ का प्यार भी न मिला, किंतु ये हार उनकी सबसे बड़ी जीत थी। …और महाभारत के महायुद्ध की थोथी महाजीत को क्या जीत कहा जा सकता है?? दरअसल इस युद्ध में सब लोग हारे थे, लड़ने वाले भी, न लड़ने वाले भी।। … और सबसे ज़्यादा हारे थे.. जीतने वाले।। तो जीत है क्या❓ “प्रसन्नता ही विजय है और खुश रहना आप चुन सकते हैं। Happiness is a Choice. “

— घनश्याम शर्मा

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