संघर्षों की करुण कहानी

संघर्षों की करुण कहानी

संघर्षों की करुण कहानी, जब चारण कोई गाएगा।
संघर्षों की करुण कहानी, जब चारण कोई गाएगा।
काम करूंँगा ऐसा, नाम मेरा आदर से लिया जाएगा।।
संघर्षों की करुण कहानी जब चारण कोई गाएगा।।

भले हो ऊंँचा, कितना गगन ये, भले अगम हो नग विशाल,
बहा पसीना सींचित कर दूँ, जीवन को दूँ बना मिसाल।
करूंँ तो कुछ भी नहीं असंभव, बिना किए क्या पाएगा।।
संघर्षों की करुण कहानी, जब चारण कोई गाएगा।
काम करूंँगा ऐसा, नाम मेरा आदर से लिया जाएगा।।।

औरों से क्या लेना अब तो, स्वयं से यारों युद्ध मेरा
लोगों का तो काम है कहना, ध्यान भटके मित्र तेरा।।
लक्ष्य निशाना नहीं चूकना, मात नहीं अब खाएगा।
काम करूँगा ऐसा, नाम मेरा आदर से लिया जाएगा।।।

विश्वासआत्म का आज जगा और नकारात्मकता छूटी।
अब ना कभी हारेगी ज़िंदगी, मिली मुझे जीवन बूटी।।
इच्छाशक्ति, दृढ़ है निश्चय, कोई नहीं अब ढ़ायेगा,
काम करूंँगा ऐसा, नाम मेरा आदर से लिया जाएगा।

संघर्षों की करुण कहानी, जब चारण कोई गायेगा।
काम करूँगा ऐसा, नाम मेरा आदर से लिया जाएगा।।
…..
नाम मेरा आदर से लिया जाएगा।
………….
नाम मेरा आदर से लिया जाएगा।।

घनश्याम शर्मा

मैं हार नहीं मानूँगा

हाँ, मैं हार नहीं मानूँगा।


हाँ, मैं हार नहीं मानूँगा।
हाँ, मैं हार नहीं मानूँगा।

बाधाएं सुरसा बन जाएं,
चाहे आंधी-तूफां आएं,
दिनकर धरती-आग लगाए,

पर मैं हार नहीं मानूँगा।
हाँ, मैं हार नहीं मानूँगा।

स्वेद की तुलना हो झरने से,
नेत्र मेरा दिन-रैना बरसे,
खून बहे फिर भी ना तरसे,

पर मैं हार नहीं मानूँगा।
हाँ, मैं हार नहीं मानूँगा।

सांस की डोरी टूट रही हो,
धड़कन दिल की रूठ रही हो,
दर्द की गांठें फूट रही हों,

पर मैं हार नहीं मानूँगा।
हाँ मैं हार नहीं मानूँगा।

दुनिया फिर दुत्कार लगाए,
मित्र मेरे मुझे दूर भगाएं,
अपने भी जब ना अपनाएं,

तब मैं हार नहीं मानूँगा।
हाँ, मैं हार नहीं मानूँगा।

जब सोचा तो जीत है पक्की,
निर्णय मुझको करना नक्की,
कर्म में डूबा, बना मैं लक्की,

बिना जीत अब ना मानूँगा।
हाँ, मैं हार नहीं मानूँगा।

हाँ, मैं हार नहीं मानूँगा।
बिल्कुल हार नहीं मानूँगा।।

— घनश्याम शर्मा