*गीतों की बस्ती का शहज़ादा…*
मैं गीतों की बस्ती का शहज़ादा, मैं राजकुमार। -2
मैं गीत बनाता, गीत ही गाता और मैं करता प्यार।
मैं गीतों की…
मेरी बांहों में संगीतों के सागर हैं लहराते। -2
पास मेरे सुख-दुख जब आते, गीत *खुशी* के ही गाते।
दर्दों में भी चीर निकालूं…
दर्दों में भी चीर निकालूं, खुशी की मैं झंकार।।
मैं गीतों की बस्ती का शहज़ादा, मैं राजकुमार।।
दुख-तकलीफें हो या हों जीवन में तेरे अंधियारा। -2
पास मेरे आ जा प्यारे, तू छोड़ के सब मेरे यारा।
तेरे हर कष्टों का यारा…
तेरे हर कष्टों का यारा, कर दूंगा संहार ।।
मैं गीतों की बस्ती का शहज़ादा, मैं राजकुमार।।
*सोचो जीने आए हो या आए हो तुम मरने। -2*
*आए थे कुछ करने और तुम लगे हो कुछ ही करने।*
हंसी-खुशी और प्यार मोहब्बत…
*हंसी-खुशी और प्यार मोहब्बत, है ये जीवन सार।।*
मैं गीतों की बस्ती का शहज़ादा, मैं राजकुमार।।
मैं गीत बनाता, गीत ही गाता और मैं करता प्यार।।
मैं गीतों की बस्ती का शहज़ादा, मैं राजकुमार।।
हूँ… हूँ.. हूँ…
— *घनश्याम शर्मा
Day: February 26, 2020
विजय का नया पंथ
विजय का नया पंथ ले
न हार है, न जीत है,
न बैर है, न प्रीत है।
निपट एकांत चल रहा,
सखा न कोई मीत है।
मनुष्य मान ले यदि,
कि हारना मुझे नहीं।
जो बढ़ चुके मेरे कदम,
रुकेंगे अब कभी नहीं।
फ़िर कौन है जो रोक ले,
हे धीर तेरी राह को ।
विजय प्रतीक्षा कर रही,
पसार अपनी बाँह को।
हताशा-हार छोड़ दे,
निराशा-नाता तोड़ दे।
विजेता बन, उभर मनुज,
दु:स्वप्न सारे तोड़ दे।
विश्वास की कलम ले थाम,
दृढ़ता का ग्रंथ ले,
छोड़ राह हार की,
विजय का नया पंथ ले।।
विजय का नया पंथ ले।।।
विजय का नया पंथ ले।।।।
–घनश्याम शर्मा
विजय का नया पंथ
हंसी बांटता हूँ
हंसी बांटता हूँ,
खुशी बांटता हूँ।
ये दौलत तो मैं
हर घड़ी बांटता हूँ।
मिले गम मुझे तो
लगे वो भी हंसने,
खुशी की नयी
फुलझड़ी बांटता हूँ।।
जब आपको लगता है कि आप हार रहे हैं या हार चुके हैं, दरअसल वो आपकी जीत की पूर्व सूचना होती है। और जब आपको लगता है कि आप जीत चुके हैं या जीत रहे हैं, दरअसल ये भ्रम है, वास्तव में ऐसा कुछ नहीं होता। भगवान राम अयोध्या से सबकुछ हारकर वनवास गये; ये जीत थी उनकी। रावण पर विजय पायी, माता सीता को घर लाये, अग्नि परीक्षा ली; हार थी उनकी। क्या मिला उन्हें?? भगवान श्रीकृष्ण जेल में पैदा हुए, जन्म देने वाली माँ का प्यार भी न मिला, किंतु ये हार उनकी सबसे बड़ी जीत थी। …और महाभारत के महायुद्ध की थोथी महाजीत को क्या जीत कहा जा सकता है?? दरअसल इस युद्ध में सब लोग हारे थे, लड़ने वाले भी, न लड़ने वाले भी।। … और सबसे ज़्यादा हारे थे.. जीतने वाले।। तो जीत है क्या❓ “प्रसन्नता ही विजय है और खुश रहना आप चुन सकते हैं। Happiness is a Choice. “
— घनश्याम शर्मा