कुछ करने की हिम्मत











कुछ करने की हिम्मत है तो,

सपने रख तू बड़े-बड़े।

दौड़ भाग कर मिलती मंजिल,

सोच रहा क्या खड़े-खड़े।



आसमान पर जोश को रखदे,

होश ज़मीं पर भी रखना।

स्वाद सफलता के तू अपने,

धीरे-धीरे ही चखना।



देख दुखों को मत डरना,

दर्दों से दोस्ती करनी है।

जिनके सपने चूर हो गए,

वहाँ रोशनी भरनी है।



अंगारों की राह भले,

नंगे पांवों को डर कैसा ?

बाधाओं को देखके लटके,

नहीं चाहिए सिर ऐसा।



यदि भयंकर भार भीत का,

तो भी मां साहस भर दे।

नहीं मानूँ मैं हार कभी,

अपने बेटे को ये वर दे।



नहीं मानूँ मैं हार कभी,

अपने बेटे को ये वर दे।

–घनश्याम शर्मा

मंगलाचरण

प्रथम मेरा ये काम है , हे गणपति महाराज ।
इसको भी पूर्ण करें , जैसे किए सब काज ।
आज साज शब्दों का लेकर , बेटा आया “माँ “,
आशीर्वाद बस यही मिले , गुरु -मात-पिता करें नाज़ ।।


—घनश्याम शर्मा

माँ शारदा- प्रार्थना

दो सुमन समर्पित करता हूँ

दो सुमन समर्पित करता हूँ, अपना मन अर्पित करता हूँ।

मां सरस्वती चरणों में तेरे , यह जीवन अर्पित करता हूँ।

तेरी कृपा से ज्ञान-देवी, मूर्ख भी ज्ञानी बनता है।

दया-दृष्टि पड़े जिस पर,सब की हैरानी बनता है।

तेरी भक्ति के बीज मैया, मैं खुद में विकसित करता हूँ।

दो सुमन समर्पित करता हूंँ, अपना मन अर्पित करता हूँ।।

अब तक जीया हूँ मैया,मैं जग की ठोकर खा-खाकर।

बिन ज्ञान, नहीं सम्मान मिला, मैं देख चुका दर जा-जाकर।

अंत शरण में तेरी मैया, मैं स्वयं को शरणित करता हूँ।

दो सुमन समर्पित करता हूँ, अपना मन अर्पित करता हूँ।

है ज्ञान-सूर्य अंबा मेरी,मुझमें ज्ञान-दीप जला दो तुम।

अंधकार जितना मुझ में,उसको तो दूर भगा दो तुम।

मन की बात बता तुझको, मैं मन को हर्षित करता हूँ।

दो सुमन समर्पित करता हूँ, अपना मन अर्पित करता हूँ।

मां सरस्वती चरणों में तेरे, यह जीवन अर्पित करता हूँ।।

यह जीवन अर्पित करता हूँ।।।।

  • घनश्याम शर्मा